कंपनी का पैसा, भूखे गार्ड्स का सहारा, इस शख्स की दरियादिली पर रो पड़ेगा आपका दिल

शख्स ने दिखाई इंसानियत Image Credit source: Getty Images

एक डॉक्टर की सोशल मीडिया पोस्ट ने इन दिनों इंटरनेट पर खूब हलचल मचा रखी है. कहानी एक बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी के कर्मचारी की है, जिसने अपने फूड अलाउंस का ऐसा इस्तेमाल किया कि लोग दो गुटों में बंट गए हैं. कुछ लोग इसे दिलदारी बता रहे हैं तो कुछ इसे नियमों के खिलाफ मान रहे हैं. दरअसल, एक्स पर डॉक्टर निलेश नोलखा ने एक किस्सा सुनाया. उन्होंने बताया कि उनकी मुलाकात बिग फोर में से एक कंपनी के एक कंसल्टेंट से हुई थी. उस कर्मचारी को कंपनी की तरफ से हर दिन सात हजार रुपये खाने-पीने के लिए मिलते हैं. सुनते ही ये रकम थोड़ी ज्यादा लगती है.

असली बात तो अब शुरू होती है. डॉक्टर नोलखा के मुताबिक, वो लड़का अपनी पूरी सोसाइटी में इसी वजह से काफी मशहूर हो गया है. वो इस अलाउंस का इस्तेमाल खुद के लिए महंगे खाने का ऑर्डर देने में नहीं करता. बल्कि वो इस पैसे से बड़े-बड़े पिज्जा मंगवाता है और वो भी अपनी सोसाइटी के सिक्योरिटी गार्ड्स के लिए. नोलखा ने अपनी पोस्ट में लिखा, एक बिग फोर कंपनी के कंसल्टेंट से मिला, जिसे रोज सात हजार रुपये का फूड अलाउंस मिलता है.

पिज्जा बना प्यार की भाषा

वो अपनी सोसाइटी में इसलिए फेमस है क्योंकि वो इस अलाउंस से अपने लिए नहीं, बल्कि सिक्योरिटी गार्ड्स के लिए बड़े पिज्जा ऑर्डर करता है. उसने तो कंपनी के फूड अलाउंस को ही सोसाइटी वेलफेयर स्कीम बना दिया है. बस फिर क्या था, ये पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई और इस पर तरह-तरह के रिएक्शन आने लगे.

कई लोगों को ये आइडिया बहुत पसंद आया. लोगों ने दिल खोलकर उसकी तारीफ की. एक यूजर ने लिखा, ऐसे लोग सच में किस्मत वाले होते हैं जो सिर्फ अपने बारे में नहीं सोचते. दूसरे ने कहा, ये वाकई में नेक काम है, उन लोगों को खिलाना जो खुद इतना महंगा खाना नहीं खरीद सकते. वहीं एक और ने कमेंट किया, अगर वो कम नसीब लोगों को खिला रहा है तो इससे अच्छा पैसे का इस्तेमाल और क्या हो सकता है. लेकिन दूसरी तरफ बहुत से लोगों को इस कहानी पर शक भी हो रहा है. उनका सवाल है कि क्या सच में कोई कंपनी इतना बड़ा अलाउंस देती है और क्या कोई उसका ऐसे इस्तेमाल कर सकता है?

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एक यूजर ने लिखा, कंपनियां अच्छा अलाउंस इसलिए देती हैं ताकि आप क्लाइंट्स या बाहर से आए लोगों को ट्रीट दे सकें. ये अपनी खुद की समाज सेवा चलाने के लिए नहीं होता. एक और यूजर ने, जो शायद कॉर्पोरेट दुनिया को अच्छे से जानता है, उसने लिखा, इतना बड़ा अलाउंस किसी को भी यूं ही नहीं मिलता, जब तक वो रोज बड़े-बड़े अफसरों से मिलने बाहर न जाता हो. और अगर आप घर बैठे रोज दो बड़े पिज्जा अपने घर के पते पर मंगवाओगे तो ऑडिट के समय इसका जवाब देना बहुत मुश्किल हो जाएगा.

यहां देखिए पोस्ट

आयुष कुमार

आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं.

अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.Read More

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