कूल बॉस बनने के चक्कर में न पड़ें, मैनेजर ने बताया कब दोस्ताना व्यवहार बन सकता है कमजोरी

‘कूल बॉस’ बनने की गलती न करें!Image Credit source: Instagram/@thehemantwadhwani

ऑफिस में बॉस और कर्मचारियों के बीच अच्छा रिश्ता होना जरूरी है, लेकिन क्या जरूरत से ज्यादा दोस्ताना रवैया कभी बॉस के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है? इंस्टाग्राम यूजर हेमंत वाधवानी ने इसी मुद्दे पर अपना अनुभव शेयर करते हुए मैनेजर्स को एक खास सलाह दी है. उनका कहना है कि बॉस को अपनी टीम के साथ अच्छा व्यवहार जरूर करना चाहिए, लेकिन इतना भी घुल-मिल नहीं जाना चाहिए कि प्रोफेशनल सीमाएं ही खत्म हो जाएं.

हेमंत ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने अपने मैनेजमेंट के अनुभव के बारे में बात की. वीडियो की शुरुआत ही उन्होंने एक सीधी बात से की. उन्होंने कहा कि किसी को भी कूल बॉस बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. हालांकि, उनका ये नजरिया किसी किताब या थ्योरी से नहीं आया, बल्कि अपने काम के दौरान मिले एक्सपीरियंस से बना. हेमंत ने बताया कि जब वह एक कंपनी में टीम मैनेज करते थे, तब उनकी कोशिश रहती थी कि उनके साथ काम करने वाले लोगों को कभी ऐसा महसूस न हो कि वह उनसे ऊपर हैं. वह टीम के सदस्यों के साथ बराबरी का व्यवहार करना पसंद करते थे. उन्हें जरूरत से ज्यादा कंट्रोल करना भी पसंद नहीं था और वह अपनी टीम को काफी आजादी दिया करते थे.

कूल बॉस बनने की गलती न करें!

शुरुआत में उन्हें लगता था कि यही एक अच्छे मैनेजर की पहचान है. लेकिन समय के साथ उन्हें महसूस हुआ कि हर चीज में जरूरत से ज्यादा छूट देना हमेशा फायदेमंद नहीं होता. अगर मैनेजर और कर्मचारियों के बीच प्रोफेशनल सीमाएं साफ न हों, तो कुछ लोग उस आजादी को हल्के में लेना शुरू कर सकते हैं. हेमंत के मुताबिक, उन्होंने अपनी टीम और जूनियर कर्मचारियों को काफी लीवरेज दिया था. लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि यही चीज उनके खिलाफ भी जा सकती है. जरूरत से ज्यादा भरोसा या छूट मिलने पर कुछ लोग मैनेजर को हल्के में ले सकते हैं और हालात बिगड़ने पर उसका नुकसान भी हो सकता है. उन्होंने इसे बैकस्टैब किए जाने के खतरे से जोड़कर देखा.

हालांकि, हेमंत का कहना यह नहीं था कि बॉस को हमेशा सख्त या डराने वाला होना चाहिए. उनकी बात का असली मतलब यह था कि दोस्ताना व्यवहार और प्रोफेशनल जिम्मेदारी के बीच एक सीमा होनी चाहिए. मैनेजर अपनी टीम के साथ हंस-बोल सकता है, उनकी बात सुन सकता है और उन्हें सहज माहौल दे सकता है, लेकिन साथ ही कर्मचारियों को यह भी पता होना चाहिए कि बॉस और टीम के सदस्य की भूमिकाओं के बीच एक फर्क है.

हेमंत की इस बात पर सोशल मीडिया यूजर्स की राय भी बंटी नजर आई. कुछ लोगों ने कहा कि अगर कोई बॉस अपनी टीम के साथ अच्छा व्यवहार करता है, तो कर्मचारियों को भी उस भरोसे और सम्मान की कद्र करनी चाहिए. उस भरोसे का गलत फायदा उठाना सही नहीं है.

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वहीं, कुछ लोगों ने इसे थोड़ा अलग नजरिए से देखा. उनका मानना था कि बॉस को दोस्ताना और approachable रहना चाहिए, लेकिन जरूरत पड़ने पर अपनी authority का इस्तेमाल करना भी आना चाहिए. उनके मुताबिक, ऑफिस का माहौल ज्यादा सहज हो तो टीम के बीच बातचीत और काम करना भी आसान हो सकता है. एक यूजर ने तो यह भी कहा कि मैनेजर को सिर्फ बॉस बनने पर ध्यान देने के बजाय एक अच्छा लीडर बनने की कोशिश करनी चाहिए. एक अच्छा लीडर अपनी टीम से सिर्फ पद के दम पर सम्मान नहीं करवाता, बल्कि अपने व्यवहार, फैसलों और नेतृत्व से लोगों का भरोसा जीतता है.

यहां देखिए वीडियो

आयुष कुमार

आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं.

अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.Read More



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