कॉर्पोरेट की चमक के पीछे छुपा दर्द!Image Credit source: pixabay
कॉर्पोरेट दुनिया में लंबे समय तक काम करने के बाद एक ऐसा रूटीन बन जाता है, जिससे बाहर निकलना आसान नहीं होता. सुबह ऑफिस जाना, पूरे दिन काम करना और फिर अगले दिन उसी चीज को वापस दोहराना, धीरे-धीरे जीवन का हिस्सा बन जाता है. कई बार लोग नौकरी से खुश नहीं होते, लेकिन जिम्मेदारियों और फ्यूचर की चिंता ऐसी होती है कि, लोग इस रास्ते पर चलने को मजबूर हो जाते हैं. मन में कई सपने होते हैं, कुछ नया करने की इच्छा होती है, लेकिन वे अक्सर नौकरी की बिजी शेड्यूल के बीच कहीं दबकर रह जाते हैं. कुछ ऐसा ही अनुभव धर्मेन्द्र पांडे का भी रहा. जिनकी कहानी लोगों के बीच वायरल हो रही है.
लगभग 18 वर्षों तक कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करने के बाद उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ने का फैसला किया. ये फैसला उन्होंने किसी रोमांचक सपने को पूरा करने या नई जिंदगी शुरू करने के मकसद से नहीं लिया, बल्कि इसके पीछे कई सालों की निराशा और संघर्ष की कहानी छिपी है.
क्यों लिया धर्मेन्द्र ने ये फैसला
धर्मेन्द्र ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने अपने इस बड़े फैसले के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि उन्होंने 18 साल तक कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया, लेकिन अब उन्होंने नौकरी छोड़ दी है. ये फैसला उनके लिए आसान नहीं था, क्योंकि उनका परिवार पूरी तरह उन पर निर्भर है. उनकी 10 साल की एक बेटी है और फाइनेंशली उनके पास इतनी ही बचत है कि अगले लगभग छह महीने तक घर का खर्च चल सके. इसके बावजूद उन्हें लगा कि अब यह कदम उठाना जरूरी हो गया था.
वीडियो में धर्मेन्द्र बताते हैं कि नौकरी छोड़ने के बाद उन्हें एक अलग तरह की राहत और आजादी महसूस हो रही है. उनके मुताबिक, पिछले कई सालों से वो अपने करियर में लगातार मेहनत कर रहे थे, लेकिन उन्हें वो पहचान और मौके नहीं मिल पाए जिसके वे हकदार थे. उन्होंने बताया कि उनकी ये जर्नी साल 2008 में शुरू हुई. शुरुआत से ही उन्होंने पूरी लगन और ईमानदारी के साथ काम किया, लेकिन समय के साथ उन्हें यह महसूस होने लगा कि मेहनत और परफॉर्मेंस के बावजूद उनकी प्रोग्रेस लीमिटेड रह गई है.
धर्मेन्द्र का कहना है कि ऑफिस की पॉलिटिक्स ने उनके करियर को काफी इफेक्ट किया. कई बार ऐसा हुआ जब उन्होंने अच्छा परफॉर्म किया, लेकिन उसका बेनिफिट किसी और को मिल गया. प्रमोशन और नई जिम्मेदारियों के अवसर अक्सर दूसरे लोगों के हिस्से में चले जाते थे. उन्हें लगने लगा कि उनकी मेहनत और एक्सपीरियंस को सही से जज नहीं किया जा रहा है. उन्होंने ये भी बताया कि इस साल फरवरी में उनकी उम्र 38 साल हो गई.
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लगभग 18 साल के एक्सपीरियंस के साथ उन्होंने अपने क्षेत्र में कई इंपॉर्टेंट स्किल डेवलप विकसित किए हैं. उनका मानना है कि उनकी काबिलीयत और अनुभव उस पद और वेतन से कहीं अधिक थे जो उन्हें नौकरी में मिल रहा था. इसी सोच ने उन्हें अपने करियर के बारे में गंभीरता से विचार करने के लिए प्रेरित किया. आखिरकार उन्होंने यह फैसला लिया कि अब उस माहौल में बने रहने का कोई अर्थ नहीं है, जहां उनकी क्षमता को वह सम्मान नहीं मिल रहा जिसकी वे अपेक्षा करते हैं. इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़कर अपने लिए एक नया रास्ता चुनने का साहस दिखाया.
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