कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संसद मार्च के दौरान जंतर-मंतर पर हुई हिंसा मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। दिल्ली पुलिस ने अब तक इस मामले में 11 एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस हिंसा की साजिश के असल आरोपियों तक पहुंचने के लिए अब तकनीक का सहारा ले रही है।
रमेश त्रिपाठी, नई दिल्ली
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई हिंसा के गुनहगारों तक पहुंचने के लिए दिल्ली पुलिस अब गूगल की भी मदद लेगी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक जांच के आधार पर शक की सुई सुनियोजित डिजिटल दस्तावेज कहे जाने वाले ‘टूलकिट’ और ‘विदेशी फंडिंग’ के बड़े नेटवर्क पर टिक गई है।
तकनीकी साक्ष्यों और शुरुआती जांच के बाद पुलिस को शक है कि जंतर-मंतर पर मौजूद छात्र और प्रदर्शनकारी तो केवल मोहरे थे। असली मास्टरमाइंड तो सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिये पर्दे के पीछे से पूरी साजिश को रचने वाले कुछ बाहरी असामाजिक तत्व थे। इन लोगों ने ही प्रदर्शन को हिंसक बनाने और भीड़ को जुटाने की रूपरेखा तैयार की थी।
जांच एजेंसियों की तकनीकी जांच का जो सबसे पेंचिदा सवाल है, वह यह कि आखिरकार यह डिजिटल दस्तावेज (टूलकिट) किसने बनाया? इसे कहां से अपलोड किया गया? और इसके पीछे किसका दिमाग था? इस सुनियोजित साजिश के मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए पुलिस गूगल से संपर्क कर रही है। मामले की जांच में जुटी पुलिस गूगल से इस टूलकिट को बनाने वाले का आईपी एड्रेस, लॉग-इन क्रेडेंशियल्स और लोकेशन डेटा शेयर करने की मांग करेगी, ताकि मुख्य साजिशकर्ता तक पहुंचा जा सके। तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, साजिश का शक गहराता जा रहा है।
डिलीट डेटा और चैट रिकवर करने की कोशिश
संदिग्धों ने पकड़े जाने के डर से अपने मोबाइल से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिटा दी थी, जिसे रिकवर करने के लिए उच्च स्तरीय तकनीकी टीमों को लगाया गया है। एक तरफ जहां ‘डिजिटल फॉरेंसिक और चैट एनालिसिस टीम’ हिरासत में लिए गए आरोपियों और संदिग्धों के वॉट्सऐप चैट्स और कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड्स (सीडीआर) को खंगाल रही है। वहीं, दूसरी तरफ उपद्रवियों ने हिंसा से ठीक पहले और बाद में जो मैसेज या ग्रुप चैट्स डिलीट कर दिए थे, उन्हें हासिल करने के लिए आधुनिक सॉफ्टवेयर की मदद ली जा रही है।
अब तक 11 एफआईआर
संसद मार्ग इलाके में टॉलस्टाय मार्ग पर पर बुधवार रात हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने एक और एफआईआर दर्ज कर कर जांच आरंभ कर दी है। इस हिंसा में दो एसीपी समेत कम से पांच पुलिसकर्मी घायल हुए थे। हिंसा से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर की संख्या अब बढ़कर 11 हो गई है।
छात्रों की भीड़ में शामिल रहे अपराधियों की तलाश तेज
वहीं, जंतर-मंतर के पास हुई हिंसा का कारण महज छात्रों का आक्रोश नहीं था, बल्कि प्रदर्शनकारियों की भीड में शामिल कुछ उपद्रवी तत्व और हिस्ट्रीशीटर बदमाश थे। इन्हें सोची समझी रणनीति के तहत भीड़ में शामिल किया गया था। यह खुलासा दिल्ली पुलिस की प्राथमिक जांच में हुआ है। पुलिस के हाथ कुछ वीडियो फुटेज भी लगे हैं। इनमें नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के एक हिस्ट्रीशीटर समेत कुछ अन्य संदिग्ध भी छात्रों की भीड़ में नजर आ रहे हैं।
फुटेज में वे नारेबाजी करते दिखाई दे रहे हैं और पहचान छिपाने के लिए अपने मुंह को बार-बार ढकने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, बवाल में अभी इनकी भूमिका क्या रही है, इसकी जांच की जा रही है। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली, राजधानी का वही इलाका है जो 2020 के दिल्ली दंगों का मुख्य केंद्र था। पुलिस अब पता लगा रही है कि इस हिस्ट्रीशीटर का प्रदर्शन से क्या संबंध है।

























