दिल्ली पुलिस की साइबर टीम ने पिछले 3-4 सालों से देश-विदेश में साइबर फ्रॉड करने वालों को कॉर्पोरेट करंट बैंक अकाउंट सप्लाई करने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा किया है। इस फर्जीवाड़े में दो प्राइवेट बैंकों के बड़े अधिकारी भी शामिल पाए गए हैं।
हेमंत पांडेय, नई दिल्ली
दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की साइबर टीम ने देशभर में फैले एक बड़े ‘म्यूल अकाउंट सिंडिकेट’ का पर्दाफाश किया है, जिसके तार दुबई और ब्रिटेन तक जुड़े हैं। पुलिस ने इस सिंडिकेट के मास्टरमाइंड सहित सूर्योदय बैंक के एक मैनेजर और इंडसइंड बैंक के 4 अधिकारियों और उनके मददगारों समेत 10 लोगों को पकड़ा है। इसके साथ ही 248 बैंक अकाउंट किट जब्त की गई हैं। महज 10 हजार रुपये के साइबर फ्रॉड से जुड़ी जांच के दौरान पुलिस 248 बैंक अकाउंट्स के जरिए 70 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन करने वाले ‘म्यूल अकाउंट’ रैकेट तक पहुंच गई।
पुलिस ने बताया कि यह सिंडिकेट पिछले 3-4 सालों से भारत, दुबई और यूके में ठगी करने वालों को कॉर्पोरेट करंट बैंक अकाउंट उपलब्ध कर रहा था। पुलिस द्वारा भारत में छिपे मुख्य आरोपी और यूएई में बैठे मास्टरमाइंड का पता लगाया जा रहा है। उनके खिलाफ ‘लुक आउट सर्कुलर’ जारी किया गया है। पुलिस को इस सिंडिकेट के खिलाफ देश के 19 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 156 शिकायतें दर्ज होने का पता चला है।
10 हजार की ठगी से खुला ठगों के रैकेट का राज
डीसीपी (सेंट्रल) रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि पटेल नगर के बलजीत नगर की पंजाबी बस्ती में रहने वाले व्यक्ति ने साइबर थाने में अपने साथ हुई ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि सोशल मीडिया पर ऑनलाइन ‘वर्क फ्रॉम होम’ फ्रीलांसिंग का लालच देकर कुछ अज्ञात ठगों ने उसे अपने जाल में फंसाया। इसके बाद जॉब रजिस्ट्रेशन और अकाउंट प्रोसेसिंग फीस के नाम पर उससे अलग-अलग किश्तों में 10,000 रुपये ट्रांसफर करवाए गए। रुपये मिलने के बाद उन ठगों ने उसे ब्लॉक कर दिया और सारी चैट भी डिलीट कर दीं।
3-4 साल से काम कर रहा था गिरोह
डीसीपी ने बताया कि पीड़ित की ओर से मिली शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के साइबर थाने में बीएनएएस की संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस को ट्रांजैक्शन ट्रेल की टेक्निकल जांच में पता चला कि ठगी गई रकम में से 5000 रुपये मल्टीपल लेयर से होते हुए ‘डैमियन ट्रेडर्स’ नाम की एक शेल कंपनी के करंट अकाउंट में भेजे गए थे, जो कि एक्सिस बैंक में है। हालांकि, शेल कंपनी के पते और उसके प्रोपराइटर के बारे में जानकारी नहीं मिल सकी। इसके बाद पुलिस बैंक अकाउंट लिंक ईमेल और मनी ट्रेल की डिजिटल प्रोफाइलिंग और एनालिसिस से फील्ड रिक्रूटर मोहित सोनी तक पहुंच गई, जिसे 8 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस को मोहित की गिरफ्तारी और आगे की जांच से एक बड़े इंटरनेशनल सिंडिकेट का खुलासा हुआ, जो संगठित तरीके से मल्टीलेयर में काम कर रहा था। यह गिरोह पिछले 3-4 सालों से भारत, दुबई और यूके में साइबर फ्रॉड के लिए पहले से एक्टिवेट किए गए ‘म्यूल बैंक अकाउंट्स’ की सप्लाई चेन चला रहा था।
वॉट्सऐप चैट से भ्रष्ट अफसरों का पता चला
टेक्निकल सबूतों से को-रिक्रूटर योगेश कुमार और म्यूल अकाउंट होल्डर रंजीत डैमियन एक्का का पता चला। उन्हें भी 8 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया गया। रंजीत के नाम पर 9 करंट अकाउंट थे। इसके बाद 14 जुलाई को शालीमार बाग में छापेमारी के दौरान चीफ कोऑर्डिनेटर दिशांत खन्ना और सहयोगी मृदुल को गिरफ्तार किया गया। पुलिस को वॉट्सऐप चैट और कैश डिपॉजिट रसीद जैसे डिजिटल सबूतों से भ्रष्ट बैंक अफसरों की मिलीभगत का पता चला। इसके बाद 20 जुलाई को सूर्योदय बैंक के मैनेजर कुंदन कुमार को गिरफ्तार किया गया और इंडसइंड बैंक के चार अधिकारियों व सहयोगियों को पकड़ा गया।
छापेमारी में ये चीजे बरामद
पुलिस ने इस पूरी छापेमारी में 248 फुल बैंक अकाउंट किट, 55 बैंक डेबिट/क्रेडिट कार्ड, 38 सिम कार्ड, 22 मोबाइल फोन, 28 फर्जी कंपनी की मुहरें, एक मारुति ब्रेजा कार और एक लाख रुपये नकद बरामद किए।
गिरफ्तार किए गए सिंडिकेट सदस्य और बैंक अधिकारी
1. दिशांत खन्ना (36), निवासी शालीमार बाग, दिल्ली। जो चीफ कॉर्डिनेटर और इस रैकेट का मास्टरमाइंड है।
2. कुंदन कुमार (35), निवासी उत्तम नगर, दिल्ली। बैंक मैनेजर, सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक, गुरुग्राम ब्रांच
3. मोहित सोनी (26), निवासी हैदरपुर, दिल्ली। चीफ सिंडिकेट सदस्य और ‘म्यूल’ रिक्रूटर
4. योगेश कुमार (35), निवासी हैदरपुर, दिल्ली। सिंडिकेट सदस्य और ‘म्यूल’ रिक्रूटर
5. रंजीत डेमियन एक्का (41), निवासी शालीमार बाग, दिल्ली। ‘म्यूल’ अकाउंट होल्डर और शेल फर्म का मालिक। इसके नाम पर 9 करंट अकाउंट हैं।
6.मृदुल (22), निवासी इंदिरा पार्क, उत्तम नगर, दिल्ली। सिंडिकेट सहयोगी और इंफ्रास्ट्रक्चर हैंडलर
7. कोमाक्षी शर्मा, निवासी: द्वारका सेक्टर-22, दिल्ली। महिला बैंक मैनेजर, इंडसइंड बैंक, द्वारका सेक्टर-22, दिल्ली। मदद करने के आरोप में हिरासत में लिया गया और कानूनी कार्रवाई के लिए पाबंद किया गया।
8. श्रीमती पायल सेठिया, निवासी: नवादा, उत्तम नगर, दिल्ली। महिला डिप्टी बैंक मैनेजर, इंडसइंड बैंक, द्वारका सेक्टर-22, दिल्ली। मदद करने के आरोप में हिरासत में लिया गया और कानूनी कार्रवाई के लिए पाबंद किया गया।
9. सृष्टि, निवासी: द्वारका सेक्टर-3, दिल्ली। महिला बैंक टेलर, इंडसइंड बैंक, द्वारका सेक्टर-22, दिल्ली; मदद करने के आरोप में हिरासत में लिया गया और कानूनी कार्रवाई के लिए पाबंद किया गया।
10. चिराग भाटिया, निवासी: पश्चिम विहार, दिल्ली। इंडसइंड बैंक, द्वारका सेक्टर-22 से जुड़े इंश्योरेंस एजेंट – इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के जरिए पैसे का लेन-देन करने और उसे रूट करने के आरोप में पकड़ा गया और पाबंद किया गया।
कैसे काम कर रह रहा था सिंडिकेट
• पुलिस को जांच में दिल्ली-NCR में ‘म्यूल अकाउंट’ हासिल करने और बेचने के एक संगठित सिस्टम के बारे में पता चला।
• रिक्रूटर सीधे-साधे लोगों को ढूंढते थे और उनके आइडेंटिफिकेशन डॉक्यूमेंट्स हासिल करते थे।
• ‘डैमियन ट्रेडर्स’ जैसी फर्जी शेल कंपनियां बनाई गईं।
• चीफ कोऑर्डिनेटर दिशांत खन्ना ने बैंक स्टाफ के साथ मिलकर तेजी से खाते खुलवाने में मदद की।
• सूर्योदय बैंक के मैनेजर कुंदन कुमार ने 75,000 रुपये रिश्वत ली, जिसमें से 55,000 उसके पर्सनल अकाउंट में जमा किए गए थे।
• इंडसइंड बैंक के अधिकारियों और एजेंटों ने कैश किकबैक और इंश्योरेंस पॉलिसी के बदले खाते खुलवाने में मदद की।
• शालीमार बाग में किराये की जगह पर बैंक अकाउंट किट का स्टॉक जमा किया गया था, जिसमें इंटरनेट बैंकिंग क्रेडेंशियल, डेबिट कार्ड, चेक बुक, पासबुक, फर्जी कंपनी की मुहरें और रजिस्टर्ड सिम कार्ड शामिल थे।
• इन एक्टिवेटेड कॉर्पोरेट बैंक किट को भारत और विदेशों (दुबई और यूके) में काम करने वाले साइबर फ्रॉड सिंडिकेट को बेचा जाता था।

























