महिला को ईमानदारी दिखाना पड़ गया भारी (सांकेतिक तस्वीर)Image Credit source: Getty Images
हम सबने सुना है कि सच की हमेशा जीत होती है, लेकिन आज के कॉर्पोरेट जगत में कई बार सच बोलना ही बहुत भारी पड़ जाता है. सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसी ही हैरान करने वाली घटना तेजी से वायरल हो रही है, जिसे पढ़कर आप भी सोच में पड़ जाएंगे कि क्या आज के समय में ईमानदारी सचमुच एक गुनाह बन गई है? आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.
नौकरी के पहले ही दिन मिला ऐसा झटका
आज के समय में एक अच्छी नौकरी पाना और उसे बचाए रखना किसी जंग से कम नहीं है. वायरल पोस्ट के मुताबिक, एक महिला को उसकी नई नौकरी के महज 4 घंटे के भीतर यानी लंच ब्रेक के दौरान ही नौकरी से निकाल दिया गया.
महिला ने इंटरव्यू के दौरान ही यह साफ कर दिया था कि उसकी शिफ्ट सोमवार से शुक्रवार सुबह 8:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक ही होगी. दरअसल, वह पहले से ही एक अस्पताल में शाम की शिफ्ट संभालती थी और अपने खर्चों व बचत के लिए यह सुबह की दूसरी नौकरी कर रही थी.
अचानक बदल गया काम का शेड्यूल
सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन नौकरी के पहले ही दिन कंपनी ने अचानक नया फरमान जारी कर दिया. कंपनी ने कहा कि अब सभी कर्मचारियों को हफ्ते में 6 से 7 दिन और रोजाना 12 घंटे काम करना होगा. इसके बाद कंपनी ने एक मीटिंग बुलाई और कर्मचारियों से पूछा कि क्या किसी को इस नए शेड्यूल से कोई परेशानी है या उन्हें किसी तरह की मदद चाहिए?
ईमानदारी दिखाना पड़ गया भारी
महिला और उसके कुछ साथियों को लगा कि कंपनी सच में उनकी मुश्किल समझेगी. महिला ने पूरी ईमानदारी से अपनी बात रखी और साथ ही यह भी ऑफर किया कि वह अपने तय छुट्टी के दिनों में 12 घंटे काम करने के लिए तैयार है. कंपनी ने मुस्कुराते हुए सबकी बात सुनी और उनके नाम नोट कर लिए. लेकिन यह राहत भरी मुस्कान बहुत ज्यादा देर नहीं टिक पाई.
लंच ब्रेक में आया फोन और बाहर का रास्ता
लंच ब्रेक के वक्त अचानक महिला का फोन बजा. यह उसकी रिक्रूटमेंट एजेंसी का फोन था. उस महिला और उन सभी लोगों को, जिन्होंने अपनी असली परेशानी बताई थी, तुरंत नौकरी से निकाल दिया गया. हैरानी की बात तो यह है कि कंपनी ने खुद सामने आकर बात करने की जहमत तक नहीं उठाई, बल्कि सिक्योरिटी गार्ड्स के जरिए उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.
सोशल मीडिया पर लोगों का फूटा गुस्सा
इस वायरल घटना पर इंटरनेट यूजर्स जमकर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं. ज्यादातर लोगों का कहना है कि महिला एक बड़ी मुसीबत से बच गई, क्योंकि ऐसी कंपनी सिर्फ कर्मचारियों का मानसिक और शारीरिक शोषण करना चाहती है. वहीं, कुछ यूजर्स ने इसे सरासर धोखा बताते हुए महिला को किसी लेबर लॉ या एम्प्लॉयमेंट वकील से मदद लेने की सलाह दी है. यह भी पढ़ें: ‘UP-बिहार-MP वालों को नो जॉब…’ बेंगलुरु के CEO के ऐलान पर बवाल!
Got hired for an 85, showed up on Day 1 to mandatory 12hr shifts 7 days a week, and was walked out by lunch for being “honest.” Then my other job flexed me
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