उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने चार जून को इस मामले में राठौर के खिलाफ दर्ज चार प्राथमिकियों में से दो को रद्द कर दिया था।
न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने हालांकि बाकी दो प्राथमिकियों में पुलिस जांच जारी रखने की अनुमति दे दी थी।
शिकायतकर्ता दुष्यंत गौतम और आरती गौर ने कहा था कि जो सामग्री फैलाई गई, उसका मकसद जान-बूझकर उनकी बदनामी करना था।
इस मामले में सार्वजनिक किए गए क्लिप में राठौर ने बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी गौतम की कथित तौर पर पहचान ‘वीआईपी’ के तौर पर की थी।
