CRPF जवान ने दिखाई दिलदारी, बुजुर्ग का भारी-भरकम ठेला धकेलकर पेश की इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल

जवान ने की मदद बुजुर्ग की मददImage Credit source: Insta/indianewspage

किसी की मदद के लिए हमेशा कुछ बड़ा करना जरूरी नहीं होता. कई बार बस सड़क पर रुक जाना, किसी परेशान आदमी के पास चले जाना और दो मिनट के लिए उसका बोझ बांट लेना ही बहुत होता है. सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर दिल खुश हो जाता है. वीडियो में एक बुजुर्ग साइकिल ठेले पर ढेर सारा सामान लादकर धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है. सामान ज्यादा है, उम्र ज्यादा है, और सड़क भी आसान नहीं लग रही. वो बार-बार ठेले को संभालते हैं, धक्का लगाते हैं, पर ठेला है कि चलने का नाम नहीं ले रहा.

तभी पीछे से एक CRPF जवान आता है. उसने ये सब देखा. चाहता तो वो भी बाकी लोगों की तरह देखकर निकल जाता, पर उसने ऐसा नहीं किया. वो सीधे बुजुर्ग के पास गया और बिना कुछ बोले ठेले को पीछे से धकेलने लगा. एक तरफ बुजुर्ग आगे से ठेला खींच रहे हैं, तो दूसरी तरफ जवान पीछे से पूरा जोर लगा रहा है.

सच्ची इंसानियत की मिसाल है ये वीडियो

ना कोई दिखावा, ना कोई हंगामा. बस एक सच्ची कोशिश कि सामने वाले का रास्ता थोड़ा आसान हो जाए और यही तो इस वीडियो की सबसे सुंदर बात है. जवान ने मदद के बदले कुछ मांगा ही नहीं. न वाहवाही लूटने के लिए कैमरे की तरफ देखा, न बुजुर्ग से थैंक्यू की उम्मीद की. उसे लगा कि मदद की जरूरत है, तो कर दी. बात खत्म.

हम अक्सर सोचते हैं कि इंसानियत मतलब कोई बहुत बड़ा काम करना. लेकिन सच तो ये है कि इंसानियत इन्हीं छोटे-छोटे पलों में छिपी होती है. किसी का बैग उठा देना, किसी बुजुर्ग को सड़क पार करा देना, किसी थके हुए इंसान के ठेले में हाथ लगा देना यही असली मदद है.

CRPF के जवानों को हम आमतौर पर वर्दी में, देश की रक्षा करते हुए देखते हैं. बंदूक, ड्यूटी, मुश्किल ऑपरेशन यही उनकी पहचान है. लेकिन इस वीडियो में एक अलग ही तस्वीर दिखती है. यहां वो जवान ड्यूटी पर नहीं, बल्कि एक आम इंसान के तौर पर एक बुजुर्ग का सहारा बना हुआ है. इससे एक बात साफ समझ आती है कि ताकत का मतलब सिर्फ दुश्मन से लड़ना नहीं होता. ताकत का असली मतलब है जब आप किसी कमजोर के साथ खड़े हो सको, बिना किसी मतलब के.

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सोच कर देखो, उस बुजुर्ग के लिए वो कुछ मिनट की मदद कितनी बड़ी रही होगी. शायद वो इसे कभी भूलेगा नहीं. और हम सबके लिए भी ये एक छोटा सा रिमाइंडर है…अगर रास्ते में कोई परेशान दिखे तो बस एक बार रुक कर पूछ लो कि काका, मदद कर दूं? यकीन मानो, आपका ये एक छोटा सा कदम किसी की पूरी दिन की थकान को हल्का कर सकता है.

यहां देखिए वीडियो

आयुष कुमार

आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं.

अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.Read More



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