Oi Defence: IWI Tavor राइफल कैसे बनी इंडियन फोर्सेज की पहली पसंद? एक मिनिट में दागती है इतनी गोलियां | Oi Defence-indian-special-forces-iwi-tavor-rifle

International

oi-Siddharth Purohit


Oi
Defence:

भारत
की
विशिष्ट
स्पेशल
फोर्स
यूनिट्स-मार्कोस
(मरीन
कमांडो),
गरुड़
स्पेशल
फोर्सेस
और
पैरा
स्पेशल
फोर्सेस-अपनी
असाधारण
दक्षता,
कठोर
प्रशिक्षण
और
राष्ट्र
की
सुरक्षा
में
महत्वपूर्ण
भूमिका
के
लिए
प्रसिद्ध
हैं।
ये
यूनिट्स
बेहतरीन
हथियारों
और
टैक्टिकल
वेपन्स
से
लैस
हैं,
जो
उन्हें
हाई
रिस्क
वाले
ऑपरेशन्स
को
सटीकता
से
अंजाम
देने
में
सक्षम
बनाते
हैं।
उनके
हथियारों
के
जखीरे
में,
IWI
Tavor
राइफल
अपने
डिज़ाइन,
मल्टी
टास्क
और
विश्वसनीयता
के
कारण
एक
पसंदीदा
विकल्प
के
रूप
में
उभर
कर
सामने
आती
है।

Tavor
राइफल
और
स्पेशल
फोर्सेस

IWI
Tavor
राइफल
भारत
के
स्पेशल
फोर्सेस
का
पर्याय
बन
चुकी
है।
नौसेना
की
स्पेशल
ऑपरेशन
यूनिट
मार्कोस
समुद्री
अभियानों,
Amphibious
warfare
और
आतंकवाद-रोधी
गतिविधियों
में
माहिर
है।
उनका
प्रशिक्षण
दुनिया
में
सबसे
कठिन
में
से
एक
माना
जाता
है,
जिसमें
गहरे
समुद्र
में
गोताखोरी
से
लेकर
करीबी
मुकाबले
तक
के
कौशल
शामिल
हैं।
वहीं,
इंडियन
एयर
फोर्स
की
स्पेशल
यूनिट
गरुड़
स्पेशल
फोर्सेस
युद्ध
खोज
और
बचाव,
आतंकवाद-रोधी
अभियान
और
हवाई
अड्डों
की
सुरक्षा
जैसे
मिशनों
को
पूरा
करती
है।
भारतीय
सेना
की
प्रमुख
इकाई
पैरा
एसएफ
diverse
terrains-रेगिस्तान
से
लेकर
पहाड़ों
तक-में
ऑपरेशन
को
सफलतापूर्वक
करने
में
सक्षम
है।

Oi Defence

हथियारों
लेकर
नई
पसंद

भारतीय
स्पेशल
फोर्सेस
में
हथियारों
का
इतिहास
समृद्ध
और
विकसित
रहा
है।
1990
के
दशक
से
पहले,
इन
इकाइयों
में
SLR
बैटल
राइफल्स
और
AK
सीरीज
की
अलग-अलग
हथियारों
का
इस्तेमाल
किया
जाता
है।
1990
के
दशक
में
Vz.58
को
अपनाना
एक
बड़ा
बदलाव
था।
वहीं,
1980
के
दशक
में
स्टायर
AUG
भारत
का
पहला
बुलपप
हथियार
बना।
इसके
बार-बार
बदलने
वाले
बैरल
और
बुलपप
कॉन्फ़िगरेशन
ने
बाद
में
INSAS
राइफलों
के
विकास
को
प्रभावित
किया
और
भारत
की
भविष्य
की
प्राथमिकताओं
को
दिशा
दी।

भारत
और
इज़राइल
की
साझेदारी

इज़राइली
इंजीनियरिंग
का
उत्पाद,
IWI
Tavor,
एक
दशक
से
भी
पहले
भारतीय
स्पेशल
फोर्सेस
को
दी
गई
थी।
Tavor
के
विकास
में
भारत
की
भागीदारी,
भले
ही
क्लासिफाइड
हो,
लेकिन
यह
दोनों
देशों
की
रणनीतिक
साझेदारी
के
लिए
बेहतर
विकल्प
है।
प्रारंभ
में,
स्पेशल
फ्रंटियर
फोर्स
(SFF)
और
पैरा
एसएफ
में
Tavor
की
शुरुआत
चुनौतियों
से
भरी
रही,
लेकिन
बाद
के
सुधारों
ने
इसे
एक
विश्वसनीय
हथियार
बना
दिया।

Tavor
राइफल
के
डिज़ाइन
की
खासियत

Tavor
राइफल
का
बुलपप
डिज़ाइन
इसकी
सबसे
बड़ी
विशेषता
है।
इसमें
रिसीवर,
मैगज़ीन
और
बोल्ट
कैरियर
को
पिस्तौल
ग्रिप
के
पीछे
रखा
जाता
है।
इससे
बैरल
की
लंबाई
से
समझौता
किए
बिना
हथियार
छोटा
और
कॉम्पैक्ट
हो
जाता
है।
यह
विशेष
रूप
से
करीबी
मुकाबले
(CQB)
में
बेहद
फायदेमंद
है,
क्योंकि
यह
तेजी
से
लक्ष्य
साधने
और
बेहतर
गतिशीलता
की
सुविधा
देता
है।

कितनी
सटीक
है
Tavor?

Tavor
का
संतुलन
और
हैंडलिंग
असाधारण
है।
इसका
डिज़ाइन
कंधे
पर
रखने
पर
अधिक
स्थिरता
हो
जाते
हैं,
जिससे
ऑपरेटर
सटीक
निशाना
साध
सकते
हैं।
आवश्यकता
पड़ने
पर
इसे
एक
हाथ
से
भी
इस्तेमाल
किया
जा
सकता
है।
ट्रिगर
ग्रुप
के
पीछे
गुरुत्वाकर्षण
केंद्र
होना
इसे
उच्च
दबाव
वाली
स्थितियों
में
भी
स्थिर
और
सटीक
बनाता
है।
क्योंकि
सारा
वजन
नीचे
की
तरह
फोकस
हो
जाता
है।

कितनी
भरोसेमंद
है?

Tavor
एक
लॉन्ग-स्ट्रोक
गैस
पिस्टन
प्रणाली
का
उपयोग
करता
है,
जो
M1
और
AK-47
जैसी
राइफलों
की
तरह
विश्वसनीय
मानी
जाती
है।
इसके
विपरीत,
M4
कार्बाइन
जैसी
राइफलें
डायरेक्ट
इम्फिंगमेंट
(DI)
प्रणाली
पर
आधारित
होती
हैं,
जो
बेहतर
नियंत्रण
तो
देती
हैं
लेकिन
जटिलता
और
कम
विश्वसनीयता
की
समस्या
भी
पैदा
करती
हैं।

दुनिया
ने
माना
लोहा

Tavor
की
विश्वसनीयता
केवल
भारत
तक
सीमित
नहीं
है।
इसे
युद्धक्षेत्र
में
अपने
प्रदर्शन
के
लिए
वैश्विक
पहचान
मिली
है।
सैन्य
विशेषज्ञ
रसेल
सी.
टिल्स्ट्रा
ने
अपनी
पुस्तक
“The
Battle
Rifle:
Development
and
Use
Since
World
War
II”
में
लिखा
है
कि
Tavor
ने
इज़राइली
रक्षा
बलों
(IDF)
के
मूल्यांकन
के
दौरान
M4
और
M16
को
पछाड़
दिया
था।
इस
रिकॉर्ड
ने
इसे
भारतीय
स्पेशल
फोर्सेस
के
बीच
और
अधिक
लोकप्रिय
बना
दिया।

स्पेशल
फोर्सेस
की
पहली
पसंद?

IWI
Tavor
राइफल
आज
भारतीय
स्पेशल
फोर्सेस
का
एक
वरदान
बन
गई
है।
इसके
हाईटैक
डिज़ाइन,
बेहतर
हैंडलिंग
और
कभी

अटकने
वाले
भरोसे
ने
इसे
ऑपरेशन
में
सबसे
पसंदीदा
हथियार
बना
दिया
है।
जैसे-जैसे
भारतीय
स्पेशल
फोर्सेस
राष्ट्रीय
सुरक्षा
के
लिए
जटिल
मिशनों
को
अंजाम
देते
रहेंगे,
Tavor
राइफल
उनके
लिए
एक
महत्वपूर्ण
और
भरोसेमंद
हथियार
बनी
रहेगी।

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Tavor
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English summary

Oi Defence: Why IWI Tavor Rifle is the First Choice of Indian Special Forces?

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