बेंगलुरु की महिला ने कॉर्पोरेट जॉब को क्यों बताया सैलरी वाला स्कूल? वायरल वीडियो ने छेड़ी नई बहस

बेंगलुरु की चारू गुप्ता का कॉर्पोरेट जॉब पर बनाया वीडियो इंटरनेट पर वायरलImage Credit source: Instagram/@the_miss_gupta

कॉर्पोरेट की चकाचौंध बाहर से जितनी लुभावनी लगती है, अंदर का सच कई बार उससे बिल्कुल अलग होता है. 9 से 5 की यह दौड़, डेडलाइंस का दबाव और हर दिन खुद को साबित करने की चुनौती, यह सब मिलकर इंसान को कभी-कभी वापस स्कूल के दिनों की याद दिला देता है. हाल ही में बेंगलुरु की रहने वाली चारू गुप्ता नाम की एक महिला कर्मचारी ने इसी कॉर्पोरेट लाइफ के कड़वे सच को बड़े ही मजेदार और सीधे तरीके से बयान किया है. उन्होंने अपनी जॉब की तुलना एक सैलरी वाले स्कूल से कर दी, जिसका वीडियो अब इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रहा है.

कॉर्पोरेट लाइफ या बिना ब्रेक का स्कूल?

चारू गुप्ता को कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करते हुए तीन साल हो चुके हैं. अपने वीडियो में वह मुस्कुराते हुए अपनी आपबीती सुनाती हैं कि इतने सालों बाद भी उन्हें हर सुबह ऐसा लगता है मानो आज कोई बहुत बड़ा एग्जाम होने वाला है. दिल में बस एक ही दुआ होती है- हे भगवान, बस आज का दिन किसी तरह से कट जाए. उनकी यह बात उन लाखों नौकरीपेशा लोगों के दिल को छू गई जो हर रोज इसी तरह के मानसिक तनाव और डेडलाइंस से जूझते हैं.

पेंडिंग असाइनमेंट और संडे नाइट का खौफ

स्कूल के दिनों की तरह ही कॉर्पोरेट जॉब में भी होमवर्क यानी पेंडिंग टास्क कभी पीछा नहीं छोड़ते. चारू बताती हैं कि हफ्ते भर काम टलता रहता है और शनिवार की छुट्टी इसी सोच में निकल जाती है कि मंडे का काम बाकी है. फिर आता है रविवार की रात का वह खौफनाक वक्त, जब देर रात लैपटॉट खोलकर जरूरी काम निपटाने पड़ते हैं. यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे बचपन में सोमवार की सुबह क्लास में जाने से ठीक पहले संडे नाइट को कॉपी पूरी की जाती थी.

सोशल मीडिया पर मिला कर्मचारियों का भारी सपोर्ट

चारू का यह वीडियो सामने आते ही लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. एक यूजर ने लिखा, मुझे लगता था कि सिर्फ मैं ही ऐसा महसूस करती हूं, पर यहां तो सब का हाल एक जैसा है. ताज्जुब की बात तो यह रही कि कई मैनेजर्स ने भी इस बात से सहमति जताई और माना कि दबाव उन पर भी उतना ही होता है. वहीं कुछ अनुभवी लोगों ने सलाह दी कि काम के तनाव को घर तक नहीं लाना चाहिए और वर्क लाइफ बैलेंस बनाना बेहद जरूरी है.

यहां देखिए वायरल वीडियो

अभिषेक राय

अभिषेक राय (Abhishek Roy) अभी TV9 भारतवर्ष के डिजिटल विंग में असिस्टेंट न्यूज एडिटर (Assistant News Editor) हैं. पत्रकारिता में उन्हें 14 साल से ज्यादा का अनुभव है और इस फील्ड में उनकी अपनी एक अलग पहचान है. अपने करियर में उन्होंने कई बड़े मीडिया संस्थानों में काम किया है.

शुरुआत में वे भोपाल के ‘पीपुल्स समाचार’ अखबार (Peoples Samachar) से जुड़े. यहां उन्होंने प्रिंट मीडिया का काम सीखा. इसके बाद वे दैनिक भास्कर (Dainik Bhaskar) ग्रुप में लंबे समय तक रहे. खास बात ये कि उन्होंने भास्कर के अखबार और वेबसाइट, दोनों जगह काम किया. इससे उन्हें पुरानी और नई, दोनों तरह की पत्रकारिता का अनुभव मिला. अभिषेक ने अहमदाबाद के ‘जानो दुनिया’ (Jano Duniya) न्यूज चैनल में भी काम किया. यहां उन्होंने टीवी मीडिया में अपनी काबिलियत दिखाई.

अभिषेक को राजनीति और विदेशी मामलों की अच्छी समझ है. वे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक कूटनीति को बहुत ही बारीकी से समझते हैं. हालांकि, वर्तमान में डिजिटल मीडिया की बदलती मांग को देखते हुए वे अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं. इन दिनों वे ट्रेंडिंग खबरों, वायरल टॉपिक्स और हटके कंटेंट पर काम कर रहे हैं.

अभिषेक के लिए पत्रकारिता महज एक पेशा या सिर्फ पाठकों तक सूचनाएं या खबरें पहुंचाना नहीं है. उनका विजन और उद्देश्य इससे कहीं अधिक व्यापक है. वे मानते हैं कि एक पत्रकार के रूप में उनकी जिम्मेदारी है कि पाठकों को हर बार कुछ नया और अनूठा पढ़ने को मिले. कंटेंट ऐसा हो जो पाठकों की सोच के दायरे को विस्तृत करे और उन्हें एक नया नजरिया दे.

अभिषेक को पत्रकारिता के साथ-साथ ट्रैवलिंग का भी शौक है. भागदौड़ भरी जिंदगी से जब भी फुर्सत मिलती है, वे पहाड़ों की तरफ निकल जाते हैं और सुकून के पल बिताते हैं.

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