10 रुपये की चाय से लाखों का कारोबार! इस चायवाले ने यूथ को कामयाबी का नया मंत्र

शर्मा चायवाले की मोटिवेशनल कहानी Image Credit source: Instagram/ ayushstartup

बिजनेस शुरू करने के लिए लाखों रुपये की पूंजी या किसी बड़े परिवार से जुड़ा होना जरूरी नहीं है. अगर मेहनत करने का जज्बा हो, काम की सही समझ हो और आगे बढ़ने की भूख हो, तो एक छोटा सा कारोबार भी बड़ी पहचान बना सकता है. इसका उदाहरण हैं ‘शर्मा कैफे रेस्टोरेंट’ के मालिक, जिनका पारिवारिक कारोबार करीब 55 साल पुराना है. आज उनकी दुकान पर रोजाना लगभग 3,000 कप चाय बिकती है और महीने का टर्नओवर 9 लाख रुपये तक पहुंच जाता है.

सोशल मीडिया पर चर्चा में आए इस चाय कारोबारी की कहानी उन युवाओं के लिए खास है, जो अपना काम शुरू करना चाहते हैं, लेकिन कम पैसों या अनुभव की कमी के कारण कदम उठाने से डरते हैं. उनका मानना है कि सफलता के लिए सबसे जरूरी चीज मेहनत, धैर्य और सीखते रहने की आदत है.

रोज 30 हजार रुपये तक की बिक्री, जानिए पूरा हिसाब

शर्मा कैफे रेस्टोरेंट में एक कप चाय की कीमत 10 रुपये है. मालिक के मुताबिक, दुकान पर हर दिन करीब 3,000 कप चाय बिक जाती हैं. इस हिसाब से रोजाना की बिक्री लगभग 30,000 रुपये होती है. हालांकि, कुछ दिनों में यह रकम 25,000 रुपये के आसपास भी रहती है.

अगर महीने के हिसाब से देखें, तो दुकान का टर्नओवर करीब 7.5 लाख से 9 लाख रुपये तक पहुंच सकता है. लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है. इतनी बिक्री का मतलब यह नहीं कि मालिक की जेब में हर महीने 9 लाख रुपये बचते हैं. चाय बनाने के लिए दूध, चीनी, चायपत्ती और दूसरे सामान पर खर्च होता है. इसके अलावा दुकान का किराया, बिजली का बिल और कर्मचारियों की सैलरी भी देनी पड़ती है. इन सभी खर्चों को निकालने के बाद ही असली मुनाफे का पता चलता है.

इस कारोबार की एक और खास बात है कि यहां करीब 30 से 35 लोगों को रोजगार मिला हुआ है. यानी एक चाय की दुकान सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि कई परिवारों की रोजी-रोटी का सहारा भी है. जब बातचीत के दौरान आयुष ने उनसे पूछा कि क्या कोई युवा कम पैसों से शुरुआत करके बड़ा बिजनेस खड़ा कर सकता है, तो उनका जवाब काफी दिलचस्प था. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दुनिया के चर्चित कारोबारी एलन मस्क का उदाहरण देते हुए कहा कि जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए शुरुआत छोटे स्तर से ही करनी पड़ती है.

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उनका मानना है कि इंसान को अपनी मौजूदा स्थिति देखकर सपने छोटे नहीं करने चाहिए. मेहनत और सही दिशा में लगातार काम करने से बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है. उनके लिए प्रधानमंत्री मोदी और एलन मस्क ऐसे उदाहरण हैं, जो अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने की प्रेरणा देते हैं.

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आयुष कुमार

आयुष कुमार, टीवी9 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं. अशोक और चाणक्य की धरती बिहार से हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की तालीम हासिल की है. पत्रकारिता में तीन साल से तिल को बिना ताड़ बनाए किसी भी सोशल मुद्दे को 360 डिग्री समझाने की कोशिश करते हैं. अमर उजाला, फिरकी डॉट इन से अपने पत्रकारीय सफर की शुरुआत की है. पाठकों तक सरल शब्दों में खबरें पहुंचाना उद्देश्य रहा है. लेखन की इस दुनिया में दिलचस्पी इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बचपन से ही काफी ज्यादा बातूनी रहे हैं. फिलहाल, टीवी9 में फीचर राइटिंग करते हुए सोशल मीडिया की नब्ज पकड़ने में माहिर हो गए है. अजीबोगरीब खबरों को गजब तरीके से लिखकर आप सबके सामने पेश करते हैं.

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