India Russia Oil Trade: अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद को लेकर क्‍या बोला है झूठ? मॉस्को ने बता दिया सच | India Russia Oil Trade: Moscow rejected America’s claim on Russian oil, said- India needs to change its stance

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oi-Bhavna Pandey

India Russia Oil Trade: अमेरिका ने दावा किया कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा, लेकिन रूस ने बिना घुमाए उसे सीधे खारिज कर दिया। अमेरिका के इस दावे पर रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उनके पास ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि भारत ने रूसी कच्चे तेल को लेकर अपना रुख बदला है। यह बयान व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट के दावे के बाद आया।

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट के बयान कहा गया कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने जा रहा है, मगर मॉस्को का जवाब साफ है-ऐसा मानने की उनके पास कोई वजह नहीं है। यानी एक तरफ़ दावे उड़ान भर रहे हैं, दूसरी तरफ़ हकीकत ज़मीन पर खड़ी दिख रही है।

India Russia Oil Trade

व्हाइट हाउस का दावा बातचीत हुई, तेल का रास्ता बदला

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने दावा किया कि अमेरिका और भारत के बीच बातचीत के बाद नई दिल्ली रूसी कच्चे तेल की खरीद खत्म करने और अमेरिका से तेल आयात बढ़ाने पर सहमत हो गया है।
लेविट के मुताबिक, यह कथित सहमति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई सीधी बातचीत का नतीजा है। उनका कहना है कि इससे अमेरिकी आर्थिक हित मज़बूत होंगे और भारत की रूस पर ऊर्जा निर्भरता घटेगी।

रूस की दो-टूक: मानने की कोई वजह नहीं

अमेरिकी दावों पर रूस ने कोई कूटनीतिक नरमी नहीं दिखाई। रूसी विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि उनके पास ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि भारत ने रूसी कच्चे तेल को लेकर अपना रुख बदला है।
मंत्रालय ने दोहराया कि भारत-रूस ऊर्जा व्यापार दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।

क्रेमलिन बाेले- साझेदारी जारी रहेगी

इससे पहले रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव भी कह चुके हैं कि भारत की ओर से रूसी तेल खरीद रोकने को लेकर कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है। उन्होंने भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई और संकेत दिया कि रिश्तों में किसी बड़े बदलाव की जानकारी क्रेमलिन के पास नहीं है।

भारत ने साधी चुप्‍पी

दिल्ली की तरफ़ से अब तक ऐसा कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है जो रूसी तेल आयात रोकने की पुष्टि करे। न समर्थन, न खंडन-सिर्फ़ रणनीतिक चुप्पी।

क्‍या सच में भारत में रूसी तेल का आयात कम हुआ है?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी में भारत का रूसी तेल आयात थोड़ा कम हुआ है। हालांकि इसे दिसंबर से शुरू हुए उस ट्रेंड का हिस्सा माना जा रहा है, जब भारतीय रिफाइनरियों ने वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश शुरू की थी। रिफाइनरी सूत्रों का कहना है कि सरकार की ओर से उन्हें रूसी तेल खरीद रोकने का कोई निर्देश नहीं मिला है।

रिफाइनरी सूत्रों के अनुसार, यदि भविष्य में ऐसा कोई फैसला लिया जाता है, तो पहले से किए गए सौदों को पूरा करने के लिए एक तय समय-यानी “विंड-डाउन पीरियड”-की ज़रूरत होगी। फिलहाल अमेरिकी दावे और रूसी इनकार के बीच भारत का आधिकारिक रुख स्पष्ट नहीं है, और किसी बड़े नीतिगत बदलाव की पुष्टि नहीं हुई है।

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