टॉक्सिक वर्क कल्चर पर इंटरनेट का फूटा गुस्सा (सांकेतिक तस्वीर)
Image Credit source: Getty Images
जब घर में कोई गंभीर मेडिकल इमरजेंसी हो और बेटा या बेटी अस्पताल के चक्कर काट रहे हों, तब भी अगर कोई बॉस काम और टारगेट की बात करने लगे, तो दिल पर क्या बीतेगी? हाल ही में इंटरनेट पर एक ऐसा ही मामला तेजी से वायरल हो रहा है, जहां एक कर्मचारी की मां अस्पताल में थी और बॉस को महीने के आखिर में सेल्स क्लोजिंग की पड़ी थी. इस असंवेदनशील वाकये ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है.
सुबह 3 बजे भेजा मैसेज, डायरेक्टर का जवाब देख उड़े होश
मामला एक सॉफ्टवेयर कंपनी की सब्सिडरी में काम करने वाले बिजनेस डेवलपमेंट एग्जीक्यूटिव का है. कर्मचारी ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती शेयर करते हुए बताया कि कुछ साल पहले उसके पिता का निधन हो चुका है और अब उसकी मां की तबीयत अक्सर खराब रहती है. हाल ही में अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे मां को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. अपनी मजबूरी बताते हुए कर्मचारी ने रात के 3 बजे डायरेक्टर को मैसेज कर ऑफिस न आ पाने की सूचना दी.
‘मां का हालचाल नहीं, टारगेट की चिंता’
डायरेक्टर ने इस गंभीर स्थिति में भी संवेदना दिखाने के बजाय जवाब दिया, ठीक है, लेकिन इस महीने के क्लोजिंग का क्या? कर्मचारी का कहना है कि वह भी बिजनेस के महत्व को समझता है, लेकिन उसने बॉस से कम से कम इतनी उम्मीद तो की थी कि वह कहे कि अपनी मां का ख्याल रखो, काम की बात बाद में करेंगे. डायरेक्टर के जवाब ने कर्मचारी को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया.
सैलरी में देरी, काम का टॉक्सिक माहौल
कर्मचारी ने अपनी पोस्ट में यह भी बताया कि डायरेक्टर को पहले से ही उसकी पारिवारिक परिस्थितियों के बारे में पता था. इसके अलावा कंपनी द्वारा समय पर सैलरी न देना और इंसेंटिव रोक लेना जैसी बातें भी उसके मन में पहले से घर किए हुए थीं. इस पूरी घटना ने उसे यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या वह इस बात पर जरूरत से ज्यादा रिएक्ट कर रहा है या वाकई यह किसी खराब वर्क कल्चर की निशानी है. यह भी पढ़ें:नौकरी छीनी नहीं, मेहनत से कमाई है! US में रहने वाले भारतीय का वायरल वीडियो, जो हर प्रवासी को देखना चाहिए
सोशल मीडिया यूजर्स का फूटा गुस्सा
यह पोस्ट सामने आते ही इंटरनेट पर आग की तरह फैल गई. नेटिजन्स ने कर्मचारी का समर्थन करते हुए कॉर्पोरेट जगत के अमानवीय रवैये की जमकर आलोचना की. एक यूजर ने कमेंट किया, इन लोगों ने पैसे के लिए अपनी इंसानियत बेच दी है, परिवार हमेशा नौकरी से पहले आता है. दूसरे यूजर ने सलाह दी, ऐसी टॉक्सिक कंपनी को तुरंत छोड़ दें, भारत में और भी अच्छी जगहें हैं जो कर्मचारियों की इज्जत करती हैं. यह भी पढ़ें:4 महीने घर बैठकर हुआ परेशान, अब रेस्टोरेंट में धोएगा बर्तन, कॉर्पोरेट जॉब गई तो बदल गई सोच
Am I overreacting to my directors response to a family emergency, or is this a red flag?
by
u/Remote_Potential6525 in
IndianWorkplace
Disclaimer: यह खबर वायरल सोशल मीडिया पोस्ट और नेटिजन्स की प्रतिक्रियाओं पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इस पोस्ट में किए गए किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है.
